Haridrakhand Rasayanam Capsules / हरिद्रखंड रसायनम कैप्सूल 30 कैप्सूल
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Relevant Mantra :शीतपपित्तं विद्रधिंच दद्रुं चर्मदलं तथा। अजीर्णं कामलां चैव श्वयुंच विनाशयेत्।।
Ayurved Vidhan : Bhaishajya Ratnavali
Why to Consume : It helps cure all kind of skin diseases. It purifies the blood, cleanses the sapta dhatu and is very beneficial in all types of cancers.
Who Can Consume : Anyone
Dosage: One capsule in the morning, afternoon and evening after food.
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शास्त्रोक्त (वैदिक) महत्व: हड़िरा (हरिद्रा) त्वचा रोगों के उपचार तथा रक्त शोधन (ब्लड प्यूरीफायर) में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। आयुर्वेदिक ग्रंथ भैषज्यरत्नावली में “पाक विधि” से बनाए गए रसायनों का विशेष उल्लेख किया गया है—जो इस प्रक्रिया की शाश्वतता को दर्शाता है ।
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इस विधि द्वारा तैयार उत्पाद रक्त को शुद्ध करता है, साथ ही सत्वतत् (सप्तधातु) संतुलन के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है ।
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संबंधित मंत्र (मनोरम):
शीतपपित्तं विद्रधिंच दद्रुं चर्मदलं तथा।यह श्लोक मूलतः वात, पित्त, ‘दद्रु’ (व्रण), ‘चर्मदाल’ (त्वचा विकार), अजीर्ण (पाचन दोष), कामला (जोंडिस), श्वयु (स्तिमित ग्रंथि) को नष्ट करने की गायत्रीय प्रक्रिया का वर्णन करता है।
अजीर्णं कामलां चैव श्वयुंच विनाशयेत्।। -
क्यों लें (उपयोग हेतु कारण):
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त्वचा रोगों का उन्नत उपचार: फोड़े, चकत्ते, खुजली, पित्त संरचित त्वचा विकारों में लाभदायक।
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रक्त शोधन और धातु संतुलन: रक्त में मौजूद दोषों व विषाक्त तत्वों को दूर कर समग्र शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है।
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कैंसर में सहायक: प्रारंभिक अध्ययन एवं शास्त्रीय मतानुसार, यह विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी उपयोगी माना जाता है।
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शक्तिवर्धन: रक्त-तंत्र का सुधार होने पर पुरुष और महिला दोनों में ऊर्जा, सहनशक्ति और प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
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कौन ले सकता है: सभी आयु वर्ग (बच्चे, वयस्क, वृद्ध)—स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किसी भी व्यक्ति के लिए उपयुक्त।
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सेवन विधि (डोज़): एक कैप्सूल, सुबह, दोपहर और शाम, भोजन के बाद।








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